कुमार विश्वास की कविता, इस साल न हों पुरनम आंखें!

2 years ago
2017 से आशाएं सब को हैं। कवि को भी होती हैं। वह भी समाज में सब कुछ अच्छा होता देखना चाहता है। ऐसे ही कुछ भावों के साथ मशहूर कवि कुमार विश्वास ने 2017 के स्वागत में ये कविता लिखी है और अमर उजाला टीवी के दर्शकों के लिए खास तौर पर साझा की है। ... ... ...

Find more trending stories and influencers in india with our professional tool By Book Marking Us ( Ctrl+D ).